इस क़ानून को लागू करने के लिए विधानसभा या लोकसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री एवं प्रधानमन्त्री इस कानून पर हस्ताक्षर करके इसे सीधे गेजेट में प्रकाशित कर सकते है।
(1) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक बोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित 4 अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
जिला पुलिस प्रमुख
स्वास्थ्य मंत्री
मुख्यमंत्री
शिक्षा मंत्री
(2) तब यदि आप उपरोक्त व्यक्तियों के काम काज से संतुष्ट नहीं है और इन्हें बदलकर किसी अन्य व्यक्ति को इस पद पर लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या इसे रद्द कर सकते है। यह स्वीकृति आपका बोट नही है। बल्कि एक सुझाव है।
(3) शुरुआती चरण में इस पासबुक के दायरे में उपरोक्त 4 अधिकारी आयेंगे। मुख्यमंत्री अन्य अधिकारियों जैसे जिला जज, हाईकोर्ट जज, चिकित्सा अधिकारी आदि के पेज भी इस पासबुक में जोड़ सकते है। यदि नागरिक भी चाहे तो इसी क़ानून की धारा 10 का इस्तेमाल करके अमुक अधिकारियों के नाम इस पासबुक में जोड़ने के लिए अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे। इस क़ानून का पूरा ड्राफ्ट देखने के लिए इस लिंक पर जाएं- Tinyurl.com/Vvp33
भारत की किसी भी पाठ्यपुस्तक एवं समाचार-पत्र ने आपको यह क्यों नहीं बताया कि- अमेरिका में मुख्यमंत्री, जिला पुलिस प्रमुख एवं हाई कोर्ट जज को शामिल करते हुए कई अधिकारीयों पर वोट वापसी क़ानून लागू है !!
असल में यह सबसे बड़ी वजह है कि, वहां की पुलिस एवं अदालतो में भारत की तुलना में काफी कम भ्रष्टाचार है। और पुलिस एवं अदालतों में भ्रष्टाचार कम होने की वजह से सभी विभागों में भ्रष्टाचार कम है। इसके अलावा अमेरिका में जिला एवं राज्य स्तर पर जनमत संग्रह प्रक्रियाएं होने के कारण यदि सरकार कोई गलत क़ानून बनाती है तो नागरिक बहुमत का प्रदर्शन करके उसे रद्द करवा देते है।
जैसे जैसे भारत में वोट वापसी कानूनों की मांग आगे बढ़ रही है, वैसे वैसे पेड मीडिया के प्रायोजक यह प्रयास कर रहे है कि वोट वापसी कानूनों की चर्चा को सिर्फ सरपंच, पार्षद, विधायक एवं सांसद जैसे कमजोर पदों तक सीमित रखा जाए। असल में, विधायक एवं सांसदों के पास गेजेट छापने की शक्ति नहीं होती है। गेजेट में क़ानून छापने की शक्ति सिर्फ मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों के पास होती है। अतः हमारा प्रस्ताव ताकतवर पदों को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाना है।